दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक रेस्टोरेंट-कमर्शियल इमारत में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। हादसा सुबह करीब 8 बजे हुआ, जब इमारत में अचानक आग भड़क उठी और कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में फैल गई। धुएं और आग से बचने के लिए कई लोगों ने जान जोखिम में डालकर ऊंची मंजिलों से छलांग लगाई। एक महिला अपने बच्चे को बचाने की कोशिश में तीसरी मंजिल से कूद गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने अपनी तरफ से बचाव कार्य शुरू किया और कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया। मौके पर मौजूद अश्विन नामक युवक ने बताया कि लोगों की चीख-पुकार सुनकर वह दौड़कर घटनास्थल पहुंचा। कुछ लोगों ने नीचे गद्दे बिछाकर कई लोगों की जान बचाई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत में गंभीर सुरक्षा खामियां थीं। भवन में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग था, जबकि आपातकालीन निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। फायर अधिकारियों के मुताबिक इमारत में न तो पर्याप्त वेंटिलेशन था और न ही कोई प्रभावी अग्नि सुरक्षा प्रणाली। बंद ढांचे के कारण धुआं तेजी से ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया और लोग अंदर फंस गए।
बताया जा रहा है कि यह इमारत 1980 के दशक में बनाई गई थी। समय के साथ इसमें कथित रूप से अवैध निर्माण कर अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गईं, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा समय रहते कोई प्रभावी निरीक्षण नहीं किया गया।
हादसे में गुरुग्राम के एक ही परिवार के आठ सदस्य भी काल का ग्रास बन गए। मृतकों में विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी, दोनों बेटियां, मां और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। दिल्ली पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल ने मामले की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर राजधानी में अग्नि सुरक्षा मानकों, अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






