नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में धूल और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार जल्द ही डस्ट पोर्टल 2.0 लॉन्च करने जा रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा विकसित इस नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्ट कैमरे, PM2.5 और PM10 सेंसर का उपयोग किया जाएगा, जिससे निर्माण स्थलों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा सकेगी।
सरकार का कहना है कि अब प्रदूषण नियंत्रण केवल निरीक्षण रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। यदि किसी निर्माण स्थल पर धूल का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा।
AI करेगा निगरानी, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
डस्ट पोर्टल 2.0 के तहत निर्माण स्थलों पर लगाए गए कैमरे और सेंसर लगातार डेटा कंट्रोल सेंटर को भेजेंगे। सिस्टम यह भी जांचेगा कि साइट पर डस्ट नेट, एंटी-स्मॉग गन और नियमित पानी का छिड़काव जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं या नहीं। नियमों का पालन न करने वाली साइटों के खिलाफ नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
QR कोड से होगी पारदर्शी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक पंजीकृत निर्माण स्थल को एक यूनिक QR कोड दिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारी इस कोड को स्कैन कर साइट से जुड़ी पूरी जानकारी, पुराने निरीक्षण और कार्रवाई का रिकॉर्ड तुरंत देख सकेंगे। इससे रिकॉर्ड छिपाने और गलत रिपोर्टिंग की संभावना कम होगी।
तीन स्तर का अलर्ट सिस्टम
सरकार ने निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए तीन चरणों वाला अलर्ट सिस्टम तैयार किया है—
- येलो अलर्ट: शुरुआती स्तर का उल्लंघन
- ऑरेंज अलर्ट: गंभीर अनियमितता मिलने पर
- रेड अलर्ट: अत्यधिक उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई
इसका उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि शुरुआती स्तर पर ही उसे रोकना है।
हवा में सुधार, GRAP-1 की पाबंदियां हटाई गईं
इसी बीच दिल्ली-एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से राहत मिली है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने वायु गुणवत्ता में सुधार को देखते हुए पूरे एनसीआर में लागू GRAP-1 की पाबंदियां हटा दी हैं। हाल की तेज हवाओं और हल्की बारिश के कारण दिल्ली का AQI 123 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में आता है।
हालांकि, आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के लिए निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण उपाय लगातार जारी रखें।








