त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत को निरस्त कर दिया। कोर्ट का यह आदेश देर रात करीब 1 बजे के बाद जारी हुआ, जिसके बाद मामले में गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि बुधवार को इस मामले में करीब पौने तीन घंटे तक सुनवाई चली थी। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में देर रात आदेश जारी करते हुए अग्रिम जमानत रद्द कर दी गई।
यह मामला त्विषा शर्मा की मौत से जुड़ा है। त्विषा की शादी 9 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी, जो गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। 12 मई 2026 को त्विषा अपने घर में फांसी पर लटकी मिली थीं। इसके बाद कटारा हिल्स थाने में दहेज प्रताड़ना और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान मृतका के परिवार की ओर से कोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए गए। कहा गया कि व्हाट्सऐप चैट्स में पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक प्रताड़ना, गर्भ को लेकर संदेह और गर्भपात के दबाव जैसी बातें सामने आई हैं। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की।
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अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के अलावा शरीर पर कई अन्य चोटों के निशान भी मिले हैं। एम्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि ये चोटें शव नीचे उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं।
सीबीआई और राज्य सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपित से पूछताछ जरूरी है। हाई कोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने उपलब्ध सबूतों और गवाहों के बयानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि व्हाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयान में गिरिबाला सिंह के खिलाफ स्पष्ट आरोप दिखाई देते हैं। साथ ही अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रही थीं। इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाई कोर्ट ने 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया।
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