वर्चुअल हियरिंग पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

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दिल्ली की अदालतों में वर्चुअल सुनवाई को अनिवार्य बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान माननीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने साफ कहा कि अदालतें किसी भी पक्ष पर वर्चुअल हियरिंग थोपने जैसा आदेश जारी नहीं कर सकतीं।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल सुनवाई को बढ़ावा देना समय की जरूरत है, लेकिन इसे लागू करने का फैसला स्वैच्छिक और सहमति आधारित होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई हाईकोर्ट्स में पहले से ही वर्चुअल हियरिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है और इस दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिला अदालतें संबंधित हाईकोर्ट के प्रशासनिक नियंत्रण में आती हैं, इसलिए इस विषय पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार हाईकोर्ट्स के पास ही रहेगा। अदालत ने माना कि तकनीक के इस्तेमाल से ईंधन की बचत, समय की बचत और सुविधा बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही वकीलों और पक्षकारों को जरूरत पड़ने पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का अधिकार भी बना रहना चाहिए।

यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में डिजिटल तकनीक और पारंपरिक कोर्ट प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाने की बहस को एक बार फिर चर्चा में ले आया है। आने वाले समय में वर्चुअल हियरिंग को लेकर हाईकोर्ट्स की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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Author: Kinni Times