दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी नेता को चुनाव लड़ने से रोकना या किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करना केवल तय कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक फैसले संविधान और कानून के दायरे में ही लिए जा सकते हैं। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि बिना ठोस कानूनी आधार के इस तरह की याचिकाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की जीत बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक लड़ाई जनता के बीच और चुनावी मैदान में लड़ी जानी चाहिए, अदालतों में बेबुनियाद याचिकाओं के जरिए नहीं।

इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से देख रहे हैं, लेकिन एक बात साफ है कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता के वोट से ही तय होता है।
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