दिल्ली विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2017 से 2022 तक की इस ऑडिट रिपोर्ट में जल आपूर्ति, सीवरेज प्रबंधन, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय व्यवस्था में भारी अनियमितताओं और कुप्रबंधन का खुलासा हुआ है।
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🔴 4,988 करोड़ का बड़ा नुकसान, गैर-राजस्व जल बना मुख्य कारण
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड को 4,988 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह गैर-राजस्व जल (Non-Revenue Water) रही, जिसमें पानी का रिसाव, चोरी या बिना बिलिंग के सप्लाई शामिल है।
गैर-राजस्व जल का स्तर 51% से बढ़कर 53% तक पहुंच गया
इससे राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की गई
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💧 पानी की बर्बादी बढ़कर 21% तक पहुंची
CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जल वितरण के दौरान पानी की भारी बर्बादी हो रही है।
पहले यह बर्बादी 16% थी, जो बढ़कर 21% हो गई
मुख्य कारण: पाइपलाइन लीकेज, खराब प्रबंधन और निगरानी की कमी
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📊 66,595 करोड़ का कर्ज, 21,696 करोड़ की वसूली बाकी
दिल्ली जल बोर्ड की वित्तीय स्थिति भी बेहद चिंताजनक बताई गई है।
मार्च 2022 तक DJB पर कुल 66,595 करोड़ रुपये का कर्ज
उपभोक्ताओं से 21,696.89 करोड़ रुपये का जल शुल्क वसूला नहीं जा सका
यह आंकड़े साफ तौर पर बोर्ड की वित्तीय कमजोरी और खराब वसूली तंत्र को दर्शाते हैं।
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⚠️ जल नीति और योजना का अभाव
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि:
2017-2022 के दौरान कोई औपचारिक जल नीति नहीं बनाई गई
जल प्रबंधन के लिए जल परामर्श परिषद का गठन नहीं हुआ
इससे दीर्घकालिक योजना और सुधार की दिशा में गंभीर कमी सामने आई है।
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🧪 पानी की गुणवत्ता पर सवाल, 55% भूजल पीने योग्य नहीं
पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं:
जांच किए गए 55% भूजल नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए
परीक्षण प्रयोगशालाओं में स्टाफ और उपकरणों की भारी कमी
BIS मानकों के अनुसार जल परीक्षण नहीं हो रहा
इसके अलावा, निजी पुनर्चक्रण संयंत्रों में कैंसरकारी पालीइलेक्ट्रोलाइट के उपयोग की भी बात सामने आई है।

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🏗️ परियोजनाओं में देरी, फंडिंग भी वापस
रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी और खराब प्रबंधन का जिक्र किया गया है:
चंद्रावल WTP पुनर्विकास परियोजना में अत्यधिक देरी
वजीराबाद WTP परियोजना में देरी के कारण एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 2,243 करोड़ रुपये की फंडिंग वापस ले ली
अयोग्य ठेकेदारों को काम सौंपने के आरोप
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💸 52.33 करोड़ रुपये का व्यर्थ खर्च
ऑडिट में यह भी सामने आया कि कई परियोजनाएं पूरी नहीं हुईं या उपयोग में नहीं लाई गईं, जिससे 52.33 करोड़ रुपये का व्यर्थ व्यय हुआ।
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⚖️ जल वितरण में असमानता पर चिंता
CAG रिपोर्ट ने दिल्ली में जल वितरण की असमानता पर भी गंभीर चिंता जताई है। कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अत्यधिक आपूर्ति देखी गई, जिससे संसाधनों का संतुलित उपयोग नहीं हो पा रहा।
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🧾 निष्कर्ष
दिल्ली जल बोर्ड पर आई यह CAG रिपोर्ट राजधानी के जल प्रबंधन की गंभीर स्थिति को उजागर करती है। कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताएं और कमजोर योजना ने न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि आम जनता को भी प्रभावित किया है।
अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस रिपोर्ट के बाद क्या कदम उठाते हैं और क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
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