मध्य पूर्व में जारी युद्ध छठे दिन और ज्यादा खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संघर्ष तेज हो गया है। इजरायल और अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, वहीं जवाबी कार्रवाई में ईरान ने पर्शियन गल्फ में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया, जिससे जहाज में आग लग गई।
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चयन में उनकी भी भूमिका होनी चाहिए। ट्रंप ने दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को “अस्वीकार्य” और “लाइटवेट” बताते हुए कहा कि वह ईरान का नेतृत्व करने के लिए सही विकल्प नहीं हैं।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान में ऐसा नेता चुना जाए जो क्षेत्र में शांति और स्थिरता ला सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर खामेनेई की नीतियों को आगे बढ़ाने वाला कोई नेता सत्ता में आया, तो अमेरिका को अगले पांच वर्षों में फिर से युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।
युद्ध की मौजूदा स्थिति
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाते हुए बड़े हमले किए। इन हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद ईरान में तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद बनाई गई है।
आज ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पर्शियन गल्फ में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर हमला कर दिया और इसकी जिम्मेदारी भी ली। इससे पहले अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया था।
दूसरी ओर इजरायल ने तेहरान, संदज और अन्य शहरों में हमलों की “दसवीं लहर” शुरू की है। इन हमलों में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी के कुछ देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।
क्षेत्रीय असर
युद्ध का असर पूरे मध्य पूर्व में दिखाई दे रहा है। हिजबुल्लाह और हूती आंदोलन भी सक्रिय हो गए हैं। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही करीब 80% तक घट गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है।
मध्य पूर्व में बढ़ते इस संघर्ष ने वैश्विक राजनीति और तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह टकराव और बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।








