दक्षिणी दिल्ली के राजपुर गांव में DDA की सरकारी जमीन पर बड़ा जमीन घोटाला, 50 हरे-भरे पेड़ काटे, GRAP-4 के बावजूद अवैध निर्माण जारी

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नई दिल्ली:
दक्षिणी दिल्ली के गांव राजपुर में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भू-माफिया सुबे सिंह बिल्डर और शिवकुमार भू माफिया बिल्डर ने मिलकर पहले DDA की सरकारी जमीन पर कब्जा किया और बाद में इस जमीन को कथित तौर पर आगे किसी बड़े भू-माफिया को बेच दिया। बताया जा रहा है कि यह जमीन कई सौ करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति है, जिस पर सुनियोजित तरीके से अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी बसाने की तैयारी की जा रही है।

सरकारी जमीन पर सुनियोजित कब्जा

मामला खसरा नंबर 68, 69 और 70, प्लॉट नंबर C No. 1617, N ब्लॉक, हरगोविंद एन्क्लेव, गांव राजपुर का है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने पहले मौके से Delhi Development Authority (DDA) का सरकारी बोर्ड हटाया और फिर जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद जमीन को छोटे-छोटे प्लॉटों में बांटकर अवैध कॉलोनी बसाने की तैयारी शुरू कर दी गई।

50 से ज्यादा हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई

स्थानीय लोगों के अनुसार इस जमीन पर 50 से अधिक दशकों पुराने हरे-भरे पेड़ मौजूद थे, जो दिल्ली के “ग्रीन लंग्स” का हिस्सा माने जाते थे। आरोप है कि इन पेड़ों को बिना किसी अनुमति, बिना ट्रांसप्लांट प्रक्रिया और बिना पर्यावरणीय मंजूरी के रातों-रात काट दिया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक बड़ा पेड़ सालों तक हजारों लोगों को ऑक्सीजन देता है। ऐसे में 50 पेड़ों की कटाई का असर आने वाले वर्षों तक पर्यावरण पर गंभीर रूप से पड़ेगा।

GRAP-4 लागू, फिर भी अवैध निर्माण

दिल्ली में इस समय Graded Response Action Plan (GRAP-4) लागू है, जिसके तहत निर्माण गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद मौके पर मशीनें, मलबा, धूल और निर्माण सामग्री दिखाई दे रही है।

यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि राजधानी की पहले से खराब हवा को और जहरीला बना रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि **Delhi Development Authority, वन विभाग, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण समिति की जानकारी के बिना इतना बड़ा अवैध कब्जा और पेड़ों की कटाई कैसे हो गई।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटना और निर्माण कार्य किसी न किसी स्तर पर प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

112 पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

बताया गया है कि 18/12/2025 को इस मामले में पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर शिकायत भी की गई थी, लेकिन उसके बावजूद मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इतना ही नहीं, पेड़ों की कटाई की शिकायतों के बावजूद अब तक न तो कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही Delhi Development Authority ने सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए डिमोलिशन या सीलिंग की कार्रवाई की।

Google Map और सैटेलाइट जांच की मांग

पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि Google Map और सैटेलाइट इमेज के जरिए जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कुछ समय पहले तक यह इलाका हरे-भरे पेड़ों से ढका हुआ था और अब वहाँ खाली प्लॉट और निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है।

FIR और CBI जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कई मांगें उठाई हैं—

भू-माफियाओं के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए

अवैध निर्माण को सील कर ध्वस्त किया जाए

पेड़ कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर वन और पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई हो

DDA, पुलिस और वन विभाग के दोषी अधिकारियों की CBI जांच कराई जाए

सरकारी जमीन को तुरंत DDA के कब्जे में वापस लिया जाए

दिल्ली के भविष्य पर खतरा

यह मामला सिर्फ जमीन कब्जाने का नहीं बल्कि दिल्ली के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। जब हरे-भरे पेड़ काटे जाते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि दिल्ली की सांसें कम हो जाती हैं।

अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह इलाका भी एक और कंक्रीट जंगल में बदल जाएगा और राजधानी की हवा और अधिक जहरीली होती चली जाएगी।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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