दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर खुलेआम हो रहे अवैध कब्जे और निर्माण ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों को भी चुनौती दी है।
जनता का कहना है तहसीलदार आशीष (मोबाइल नंबर: 9899032215) पर करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को लेकर भू-माफिया से नजदीकी संबंध रखने और करोड़ों की रकम लेकर अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने के आरोप हैं।
मामला शाहूरपुर गांव के शनि धाम मोड़ से लेकर शनि धाम मंदिर तक फैली उस सरकारी भूमि से जुड़ा है, जहां खसरा नंबर 163, 256, 334, 259, 273, 274, 276 और 350 पर भू-माफिया द्वारा जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अवैध कॉलोनियां बसाई जा रही हैं और धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कब्जा
इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश। Civil Appeal No. SLP (C) No. 26697 of 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीवांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां शामिल थे, ने 17 मई 2024 को साफ निर्देश दिए थे कि
सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाया जाए और किए गए निर्माण को तोड़कर जमीन को मूल स्वरूप में वापस लिया जाए।
इसके बावजूद न तो निर्माण रोका गया और न ही कब्जा हटाने की कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दी।
ग्रैप-4 लागू, फिर भी निर्माण और प्रदूषण
हैरानी की बात यह है कि जिस इलाके में यह अवैध निर्माण हो रहा है, वहां GRAP-4 (Graded Response Action Plan) लागू है, जिसके तहत किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। इसके बावजूद DDA और फॉरेस्ट लैंड पर खुलेआम निर्माण कर न सिर्फ नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषण भी फैलाया जा रहा है।
नेचुरल बरसाती नाले पर कब्जा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध निर्माण के लिए प्राकृतिक बरसाती नाले को बंद कर दिया गया है, जिससे इलाके में जलभराव, पर्यावरणीय क्षति और भविष्य में बड़े खतरे की आशंका बढ़ गई है। यह सीधे-सीधे पर्यावरण कानूनों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।
इस पूरे प्रकरण में DDA, दक्षिणी दिल्ली प्रशासन और साकेत स्थित संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि—
पहले अवैध निर्माणकर्ताओं से लेन-देन कर आंखें मूंद ली जाती हैं,
बाद में दिखावटी कार्रवाई की तैयारी होती है,
लेकिन जमीनी स्तर पर कब्जा जस का तस बना रहता है।
स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि संबंधित तहसीलदार आशीष (मोबाइल नंबर: 9899032215) पर करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को लेकर भू-माफिया से नजदीकी संबंध रखने और भारी रकम लेकर अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने के आरोप हैं।
पुलिस की निष्क्रियता भी सवालों में
थाना मैदानगढ़ी की भूमिका भी कटघरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना अध्यक्ष दिन में दो बार उसी मार्ग से गुजरते हैं, फिर भी सरकारी जमीन पर हो रहे खुले कब्जे और निर्माण उनकी नजरों से कैसे बच जाते हैं?
आज 112 नंबर पर कॉल करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पुलिस की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या फाइलों में दब जाएगा मामला?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या DDA, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप कब्जा हटाकर निर्माण तोड़ने की कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी पहले की तरह फाइलों में दबाकर भू-माफिया को खुली छूट दे दी जाएगी?
सरकारी जमीन, पर्यावरण और कानून—तीनों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।








