दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा मोदी फार्म, खरक रोड, एग्जीक्यूटिव क्लब रोड, चांदन होला और शाहूरपुर गांव में डिमोलिशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है। सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों को गिराने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है, जिससे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
शनि धाम मोड़ पर अवैध कॉलोनी का खेल
लेकिन इसी शाहूरपुर गांव के शनि धाम मोड़ से लेकर शनि धाम मंदिर तक की जमीन पर एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। खसरा नंबर 163, 256, 334, 259, 273, 274, 276 और 350 की सरकारी जमीन पर भू-माफिया खुलेआम कब्जा कर रहा है। यहां जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अवैध कॉलोनी बसाई जा रही है और धड़ल्ले से अवैध निर्माण चल रहा है।
सवालों के घेरे में DDA की कार्रवाई
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जहां एक तरफ DDA का बुलडोजर लगातार चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कब्जे और निर्माण पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? कहावत है—“एक तरफ बनत है, दूसरी तरफ टूटत है”, लेकिन यहां तो अवैध निर्माण को जैसे खुली छूट मिली हुई है।
पहले जेब गर्म, फिर डिमोलिशन?
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि पहले अवैध निर्माण करने वालों से लेन-देन कर आंखें मूंद ली जाती हैं और बाद में औपचारिकता के तौर पर डिमोलिशन प्रोग्राम चलाया जाता है। इस पूरे मामले में DDA के अधिकारी शक के दायरे में आ रहे हैं।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
थाना मैदानगढ़ी के थाना अध्यक्ष दिन में दो बार उसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जे और अवैध निर्माण उनकी नजरों से कैसे बच रहे हैं? यह सवाल भी आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
शाहूरपुर गांव में चल रही यह दोहरी व्यवस्था प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि अवैध निर्माण गलत है तो वह हर जगह गलत है—चाहे वह किसी एक इलाके में हो या शनि धाम मोड़ के पास। अब देखने वाली बात यह है कि क्या DDA और पुलिस प्रशासन इस खुलेआम हो रहे अवैध कब्जे पर भी उसी सख्ती से कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।








