दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अब सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे साल लोगों की सेहत और जिंदगी पर असर डाल रहा है। साल 2025 भी दिल्ली-NCR के लिए प्रदूषण के लिहाज से राहत भरा नहीं रहा। नई रिपोर्ट्स बताती हैं कि राजधानी और आसपास के शहर देश के सबसे प्रदूषित इलाकों में लगातार शामिल रहे।
CREA की रिपोर्ट ने खोली पोल
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली NCR का सबसे प्रदूषित शहर रहा। इसके बाद गाजियाबाद और नोएडा का स्थान है। रिपोर्ट में बताया गया कि भले ही सालाना औसत PM2.5 स्तर में थोड़ी गिरावट आई हो, लेकिन अक्टूबर से दिसंबर के प्रदूषण सीजन में स्थिति 2024 से भी खराब रही।
दिल्ली के सभी 40 एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों पर PM2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानक से कम से कम 1.8 गुना अधिक दर्ज किया गया। राजधानी का सालाना औसत PM2.5 स्तर 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय सीमा से 2.4 गुना और WHO की सुरक्षित सीमा से करीब 19 गुना ज्यादा है।
कई शहरों में निगरानी ही कमजोर
NCR के 29 शहरों में से सिर्फ 14 शहरों में ही पर्याप्त एयर क्वालिटी डेटा उपलब्ध हो सका। हरियाणा के कई शहरों में प्रदूषण मॉनिटरिंग बेहद कमजोर रही, जिससे असली हालात का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
जहांगीरपुरी सबसे प्रदूषित इलाका
दिल्ली में जहांगीरपुरी सबसे प्रदूषित इलाका रहा, जहां PM2.5 का औसत स्तर 130 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसके बाद वजीरपुर, बवाना, आनंद विहार और रोहिणी जैसे इलाके भी गंभीर श्रेणी में रहे। यहां तक कि दिल्ली का सबसे कम प्रदूषित इलाका द्वारका भी तय मानकों से काफी ऊपर रहा।
क्यों नहीं सुधर रही हवा?
विशेषज्ञों के अनुसार, NCR में प्रदूषण अब सालभर बना रहता है। CREA के विश्लेषक मनोज कुमार का कहना है कि शॉर्ट-टर्म उपायों से स्थायी सुधार संभव नहीं है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के मुताबिक, दिल्ली के कुल PM2.5 प्रदूषण का सिर्फ 35% स्थानीय स्रोतों से आता है, जबकि 65% प्रदूषण बाहरी क्षेत्रों से आता है। इसमें वाहनों का योगदान सबसे ज्यादा, करीब 46% है।
सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियां, अस्थमा, दिल से जुड़ी समस्याएं और समय से पहले मौत के खतरे बढ़ रहे हैं। सर्दियों में AQI 400 से ऊपर पहुंचने पर स्कूल बंद करने, निर्माण कार्य रोकने और लोगों को घरों में रहने की सलाह देनी पड़ती है। इससे न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
समाधान क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्या का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति जरूरी है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना
- फसल अवशेष जलाने का स्थायी विकल्प देना
- निर्माण और उद्योगों पर सख्त निगरानी
- कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल
- राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सख्त अमल
नया साल आ चुका है, लेकिन दिल्ली-NCR के लोगों के लिए साफ हवा अब भी एक सपना बनी हुई है। सवाल यही है कि क्या 2026 में यह सपना हकीकत बन पाएगा?








