अफ़ग़ानिस्तान में पिछले दो दिनों से जारी इंटरनेट और फोन सेवाओं का ब्लैकआउट आखिरकार खत्म हो गया है। तालिबान प्रशासन ने अचानक लागू किए गए इस प्रतिबंध को हटा दिया और देशभर में कनेक्टिविटी बहाल कर दी।
नागरिकों की खुशी और जश्न
जैसे ही नेटवर्क सेवाएं वापस लौटीं, राजधानी काबुल समेत हेरात, कंधार और मजार-ए-शरीफ़ जैसे बड़े शहरों में लोग सड़कों पर निकल आए। कई जगह नागरिकों ने पटाखे फोड़े, गाड़ियां दौड़ाईं और सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से संपर्क कर अपनी खुशी जताई। लंबे समय बाद दोबारा ऑनलाइन लौटने पर अफ़ग़ान नागरिकों ने राहत की सांस ली।
ब्लैकआउट के दौरान मुश्किलें
दो दिन तक नेटवर्क बंद रहने से आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था।
परिवार के सदस्य एक-दूसरे से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।
कारोबारी गतिविधियां ठप हो गई थीं।
विदेशों में बसे अफ़ग़ान नागरिक अपने परिजनों से जुड़ने में असमर्थ थे।
अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो गया था।
लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक हुए इस ब्लैकआउट ने उन्हें डर और असुरक्षा से भर दिया था। कई लोगों को आशंका थी कि कहीं देश में किसी बड़े राजनीतिक या सैन्य कदम की तैयारी तो नहीं चल रही। लेकिन अब सेवाओं की वापसी ने उन्हें उम्मीद दी है कि हालात धीरे-धीरे सामान्य होंगे।
तालिबान प्रशासन पर सवाल
हालांकि तालिबान प्रशासन ने ब्लैकआउट की वजह साफ़ नहीं बताई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम किसी सुरक्षा कारण से उठाया गया होगा। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इस तरह की पाबंदी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नागरिकों को संचार से वंचित करना मौलिक अधिकारों का हनन है।
कुल मिलाकर, इंटरनेट और फोन सेवाओं की बहाली ने अफ़ग़ानिस्तान के नागरिकों को नई ऊर्जा और राहत दी है। लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि आगे इस तरह के अचानक ब्लैकआउट का सामना उन्हें न करना पड़े।







