दिवाली से पहले पटाखों पर बैन को लेकर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है तो यह सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे देश पर लागू होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ राजधानी के लोग ही साफ हवा का अधिकार रखते हैं? मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पिछले साल जब वह अमृतसर गए थे, वहां का प्रदूषण दिल्ली से भी खराब बताया गया। ऐसे में पूरे देश के नागरिकों को स्वच्छ हवा का अधिकार मिलना चाहिए।
अदालत ने यह टिप्पणी पटाखा व्यापारियों की याचिका पर की, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर एक साल के बैन का विरोध किया गया था। व्यापारियों का कहना है कि इस उद्योग पर कई परिवारों की आजीविका निर्भर करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से जवाब मांगा है और कहा है कि नीति पूरे देश के लिए एक समान होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि जब निर्माण कार्य या मजदूरी पर प्रतिबंध लगता है तो गरीब वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होता है, इसलिए सरकार को ऐसे मामलों में मुआवजा और वैकल्पिक उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी, जब दिवाली और दशहरा से पहले केंद्र सरकार हरित पटाखों और प्रदूषण नियंत्रण की रिपोर्ट पेश करेगी।








