दिल्ली के संगम विहार इलाके में गली नं. 8/3, खसरा नं. 1942/1285, रतिया मार्ग पर अवैध निर्माण का मामला सामने आया है। यह निर्माण न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि National Green Tribunal (NGT) की गाइडलाइंस का भी खुला उल्लंघन कर रहा है।
स्थानीय समाजसेवी ने इस मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
खुले में निर्माण से पर्यावरण और मानव जीवन को खतरा
शिकायत के अनुसार, यह निर्माण कार्य पूरी तरह खुले में किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में धूल, प्रदूषण, शोर और अनियंत्रित मलबा फैल रहा है। यह सीधा NGT के पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के निर्माण कार्यों से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार व्यक्तियों की जान को भी गंभीर खतरा है।
112 नंबर पर सूचना देने के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने 112 पर कॉल कर तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे इलाके में प्रशासन के प्रति निराशा और आक्रोश का माहौल है।
प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई शिकायत
शिकायतकर्ता ने निम्नलिखित उच्च अधिकारियों और विभागों को लिखित शिकायत पत्र भेजा है:
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार
उपराज्यपाल, दिल्ली
मुख्य सचिव, दिल्ली
स्पेशल कमिश्नर, विजिलेंस
डीसी, साउथ दिल्ली नगर निगम
वाइस चेयरमैन, डीडीए
एसडीएम, संगम विहार
डीसीपी, साउथ दिल्ली
थाना प्रभारी, थाना संगम विहार
उन्होंने मांग की है कि NGT की गाइडलाइंस की अवहेलना करने वाले इस निर्माण को तुरंत रोका जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
क्या प्रशासन देगा जवाब?
जिस देश में पर्यावरण संरक्षण की बात हर मंच पर होती है, वहीं राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों को स्थानीय स्तर पर खुलेआम नज़रअंदाज़ किया जाना एक गंभीर लापरवाही है।
प्रशासन की चुप्पी इस लापरवाही को और बढ़ावा दे रही है।
संगम विहार की यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है —
क्या हमारे शहर में कानून सिर्फ कागज़ों पर रह गए हैं?
जब तक स्थानीय प्रशासन NGT जैसे संवैधानिक निकायों के आदेशों का पालन नहीं करता, तब तक ऐसे अवैध निर्माणों पर लगाम लगाना असंभव रहेगा।



