लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर को लेकर महत्वपूर्ण मांग की है। दोनों नेताओं ने सरकार से आग्रह किया है कि आगामी मॉनसून सत्र 2025 में संसद में एक ऐसा विधेयक लाया जाए, जिसके माध्यम से जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
प्रधानमंत्री मोदी को भेजा गया पत्र
कांग्रेस नेताओं ने पत्र में लिखा है:
“हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में एक विधेयक लाए। आपने स्वयं कई मौकों पर व्यक्तिगत रूप से दोहराया है कि सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
यह पत्र कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भी सार्वजनिक रूप से साझा किया है।
राहुल गांधी: “जम्मू-कश्मीर के लोगों की मांग जायज़ है”
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में कहा कि पिछले पाँच वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लोग लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग कर रहे हैं। यह मांग न केवल संवैधानिक रूप से वैध है बल्कि जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से भी जुड़ी हुई है।
नेताओं का मानना है कि जम्मू-कश्मीर की जनता को राजनीतिक भागीदारी और आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना चाहिए, जो केवल पूर्ण राज्य के दर्जे से संभव है।
पीएम मोदी के पुराने बयानों का दिया हवाला
कांग्रेस नेताओं ने अपने पत्र में पीएम मोदी के उन बयानों का भी हवाला दिया है जिनमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने की बात कही थी:
19 मई 2024, भुवनेश्वर में दिए गए एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा था:
“राज्य का दर्जा बहाल करना हमारा एक गंभीर वादा है और हम इस पर कायम हैं।”
19 सितंबर 2024, श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने फिर दोहराया:
“हमने संसद में कहा है कि हम इस क्षेत्र का राज्य का दर्जा बहाल करेंगे।”
राजनीतिक संकेत: क्या सरकार लाएगी विधेयक?
राहुल और खरगे की इस अपील के बाद अब नजरें केंद्र सरकार की रणनीति पर टिकी हैं। संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई नया विधेयक लाती है।
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद उसे पूर्ण राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। तब से इस निर्णय को लेकर लगातार बहस और मांगें जारी हैं।








