जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के समर्थन में लंबे समय से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे राजघाट पहुंचे और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।लद्दाख लौटने से पहले राजघाट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा, “26 दिनों का अनशन समाप्त होने के बाद मैं सबसे पहले बापू को याद करने राजघाट आना चाहता था। मैं देश को यह संदेश देना चाहता हूं कि गांधी जी का दिखाया रास्ता सौ साल बाद भी उतना ही प्रासंगिक और सही है, जितना पहले था। अहिंसा और शांतिपूर्ण मार्ग से ही वास्तविक सफलता मिलती है।
अहिंसा से ही संभव हुआ समाधान
सोनम वांगचुक ने देश के युवाओं और नागरिकों को शांतिपूर्ण आंदोलन की सफलता की बधाई दी। उन्होंने जोर देकर कहा, “अगर इस आंदोलन से कोई उपलब्धि हासिल हुई है, तो वह लाठी या पत्थरों के जोर से नहीं, बल्कि शांति की अपील और हमारे खुद के त्याग से मिली है। बापू के बताए अहिंसा के रास्ते पर चलकर ही देश और दुनिया की किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। समय जरूर लग सकता है, लेकिन इसका अंत कभी अंधेरे में नहीं होता।
26 दिनों तक चला था आमरण अनशन
गौरतलब है कि नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे। 26 दिनों के लंबे उपवास के दौरान उनका वजन 10 किलोग्राम से अधिक घट गया था और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पहले सफदरजंग और फिर गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।








