पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के खराब रहने और निगरानी तंत्र के फेल होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज स्वत: संज्ञान से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। अदालत का कहना है कि हिरासत में होने वाली घटनाओं और मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरों का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में ही आदेश दिया था कि देशभर के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि हिरासत में पुलिस ज्यादती पर अंकुश लगाया जा सके। लेकिन चार सितंबर को मीडिया में आई रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 के शुरुआती सात–आठ महीनों में पुलिस हिरासत में करीब 11 मौतें हो चुकी हैं। इसी रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्वत: जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश दिया और अब इस पर सुनवाई हो रही है।
2020 का आदेश भी अधूरा
गौरतलब है कि दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि सीबीआई, ईडी और एनआईए सहित सभी जांच एजेंसियों के दफ्तरों में भी सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाए जाएं। लेकिन शिकायतें लगातार आती रही हैं कि कई थानों और एजेंसियों के दफ्तरों में कैमरे या तो लगे ही नहीं हैं या फिर खराब पड़े रहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई से साफ है कि अदालत इस मुद्दे को बेहद गंभीर मान रही है और पुलिस हिरासत में हो रही मौतों पर कड़ी निगरानी चाहती है।








