सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटा भी दिया जाता है, तो इसका असर उसकी अन्य सरकारी सुविधाओं पर नहीं पड़ना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वोटर लिस्ट से नाम हट जाने के आधार पर किसी नागरिक का राशन या अन्य वैधानिक लाभ बंद नहीं किए जा सकते।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ पश्चिम बंगाल के निवासी मोहिबुल्ला मंडल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जून में जारी आदेश के आधार पर उनका राशन कार्ड रद्द, निलंबित या समाप्त न किया जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची और राशन कार्ड दो अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के तहत संचालित होते हैं। किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटने का यह अर्थ नहीं है कि वह राशन जैसी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का पात्र नहीं रहेगा। अदालत ने संकेत दिया कि नागरिकों के वैधानिक अधिकारों को केवल चुनावी सूची से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
यह मामला उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नाम हटने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि मतदाता सूची में बदलाव का सीधा प्रभाव राशन कार्ड या अन्य सरकारी लाभों पर नहीं पड़ता।
अब इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत याचिकाकर्ता की मांग और राज्य सरकार के पक्ष पर विस्तार से विचार करेगी।








