बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है किशनगंज के सम्राट अशोक भवन में आयोजित जदयू के जिला स्तरीय कार्यक्रम के दौरान नगर मुख्य पार्षद इंद्रदेव पासवान समेत कई पार्षदों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जनता दल (यूनाइटेड) का दामन थाम लिया. कार्यक्रम में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, बिहार सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम रसूल बलियावी भी मौजूद रहे. इस आयोजन में इंद्रदेव पासवान के साथ कई वार्ड पार्षदों ने जदयू की सदस्यता ग्रहण की और पार्टी की विचारधारा से जुड़ने की बात कही. मंच पर सभी नए कार्यकर्ताओं को उमेश कुशवाहा और अन्य नेताओं ने माला पहनाकर स्वागत किया और पार्टी में उनका स्वागत किया गया. जदयू में शामिल होने वालों में शबनम खातून, अमित त्रिपाठी (वार्ड 13), बदरे आलम, नौशर नजरी (वार्ड 15), मनोवारा खातून (वार्ड 18), अब्दुल गफूर (वार्ड 19), सूफिया खातून (वार्ड 21), दीपक कुमार (वार्ड 2), गजाला मजहर (वार्ड 9), शंभू राम, बदलू कुमार साह, सावित्री कुमारी, रौनक औरा, वसीम खान समेत दर्जनों नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे. जदयू के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम रसूल बलियावी ने मंच से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर करारा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मां-बहनों के हक के लिए काम किया है, लेकिन राजद की ‘माई बहिन योजना’ सिर्फ अपने ‘माई’ (मां) तक सीमित है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनाव आता है तो मुसलमानों को याद करते हैं, पर असल प्रतिनिधित्व से वंचित रखते हैं. बलियावी ने तीखे शब्दों में कहा कि अब मुस्लिम समाज समझ गया है कि उसे सिर्फ इस्तेमाल किया जाता है.
वोट के टाइम पर नहीं पड़ती है अब्दुल बारी सिद्दीकी’ जैसे नेताओं की जरूरत
जब वोट की जरूरत होती है तब ‘अब्दुल बारी सिद्दीकी’ जैसे नेताओं की जरूरत नहीं पड़ती और जब विपक्ष की बात होती है तब माई याद आती है. उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए नारा दिया ‘2025 में विपक्ष फिनिश, फिर से नीतीश. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी राजद और लालू प्रसाद यादव के परिवार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वक्फ कानून के बाद पार्टी से बाहर जाने वालों के जाने से पार्टी की गंदगी साफ हो गई है. तेजप्रताप यादव से जुड़ी हालिया घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज जब तेजप्रताप को लेकर नैतिकता की बात हो रही है, तो पहले जब अपने घर की बहू को निकाला गया था, तब नैतिकता कहां थी? उन्होंने आगे कटाक्ष किया कि माई बहिन योजना की बात करने वालों को पहले अपने घर की माओं-बहनों का सम्मान करना सीखना चाहिए समाज को छलने का काम अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा.



