दिल्ली के रिहायशी इलाकों से हटेंगे अव्यवस्थित, गोदाम! मास्टर प्लान-2047 में बड़ा बदलाव

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नई दिल्ली: दिल्ली के रिहायशी इलाकों, गांवों और पुराने बाजारों में लंबे समय से संचालित हो रहे अनियोजित और बेतरतीब गोदामों पर अब कार्रवाई की तैयारी है। मास्टर प्लान-2047 में ऐसे गोदामों को व्यवस्थित करने और नियमों के दायरे में नहीं आने वाली गोदाम गतिविधियों को शहर के भीतर से हटाकर निर्धारित क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक दबाव, पार्किंग की समस्या, सड़क पर माल लोडिंग-अनलोडिंग और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों को कम करना है।

पहले नियमित होंगे पात्र गोदाम, बाकी होंगे स्थानांतरित

मास्टर प्लान-2047 के तहत सभी मौजूदा गोदामों को एक ही बार में हटाने के बजाय पहले यह देखा जाएगा कि कौन से गोदाम निर्धारित नियमों के तहत नियमित किए जा सकते हैं। जो गोदाम नियोजन मानकों और तय शर्तों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें एकीकृत माल ढुलाई केंद्रों या नियोजित थोक बाजारों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी।

योजना का उद्देश्य भविष्य में दिल्ली के रिहायशी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गोदामों की अनियोजित गतिविधियों को रोकना है। इसके लिए माल के भंडारण और वितरण के लिए अलग-अलग, बेहतर सुविधाओं से लैस और नियोजित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।

दिल्ली में रोजाना 1.69 लाख मालवाहक वाहनों की आवाजाही

दिल्ली में माल ढुलाई की गतिविधियों का दबाव काफी बड़ा है। योजना के मुताबिक, राजधानी में रोजाना करीब 1.69 लाख मालवाहक वाहन प्रवेश करते हैं और बाहर निकलते हैं। इनमें मालवाहक ऑटो की हिस्सेदारी करीब 32.1 प्रतिशत है। बड़ी संख्या में मालवाहक वाहनों की आवाजाही का सीधा असर शहर की सड़कों, पार्किंग व्यवस्था और यातायात पर पड़ता है।

पुरानी दिल्ली और अन्य घने इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जहां थोक कारोबार, माल भंडारण और दुकानों के आसपास लोडिंग-अनलोडिंग के कारण सड़कों पर अतिरिक्त दबाव बनता है। इसी समस्या को देखते हुए मास्टर प्लान में थोक कारोबार और गोदाम गतिविधियों को उपयुक्त और नियोजित क्षेत्रों में ले जाने का प्रावधान किया गया है।

दिल्ली में पहले से मौजूद हैं माल ढुलाई और परिवहन केंद्र

दिल्ली में माल ढुलाई और परिवहन गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए पहले से कई प्रमुख केंद्र मौजूद हैं। फिलहाल गाजीपुर और नरेला में दो एकीकृत माल ढुलाई केंद्र हैं। इसके अलावा संजय गांधी नगर, आजादपुर और पंजाबी बाग में तीन परिवहन नगर मौजूद हैं।

इन केंद्रों का इस्तेमाल माल की आवाजाही और भंडारण को शहर के अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित करने के लिए किया जा सकता है। मास्टर प्लान-2047 के तहत भविष्य में ऐसे नियोजित क्षेत्रों को और विकसित करने पर जोर दिया गया है।

चार प्रमुख फल-सब्जी मंडियां संभालती हैं हजारों टन माल

दिल्ली की प्रमुख फल और सब्जी मंडियां भी राजधानी की माल ढुलाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आजादपुर, केशवपुरम, ओखला और गाजीपुर की चार प्रमुख फल-सब्जी मंडियां प्रतिदिन करीब 21,123 टन माल संभालती हैं।

इतनी बड़ी मात्रा में माल की आवाजाही के कारण इन क्षेत्रों में भारी वाहनों, मालवाहक ऑटो और अन्य परिवहन साधनों का दबाव रहता है। इसलिए मास्टर प्लान में मौजूदा थोक बाजारों और मंडियों के आधुनिकीकरण की योजना भी शामिल की गई है।

पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों पर भी नजर

पुरानी दिल्ली के घने और पुराने इलाकों में थोक कारोबार तथा गोदाम गतिविधियां लंबे समय से शहरी व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। संकरी सड़कों और सीमित पार्किंग के बीच बड़ी मात्रा में माल की आवाजाही से ट्रैफिक जाम और अन्य समस्याएं पैदा होती हैं।

मास्टर प्लान-2047 में ऐसे क्षेत्रों की थोक और गोदाम गतिविधियों को धीरे-धीरे अधिक उपयुक्त और नियोजित स्थानों पर स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए दिल्ली सरकार और स्थानीय निकाय समय-सारणी तैयार कर सकते हैं।

तुगलकाबाद का कंटेनर केंद्र भी हो सकता है शिफ्ट

माल ढुलाई से जुड़े बड़े केंद्रों को लेकर भी योजना में महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। तुगलकाबाद स्थित अंतर्देशीय माल कंटेनर केंद्र (ICD) को दिल्ली से बाहर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की संभावना तलाशने की बात कही गई है।

यदि यह बदलाव लागू होता है तो राजधानी के भीतर भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही और माल परिवहन से जुड़े दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

ई-कॉमर्स बढ़ने के साथ छोटे गोदामों को भी जगह

ऑनलाइन खरीदारी और ई-कॉमर्स कारोबार के तेजी से बढ़ने के कारण छोटे और स्थानीय स्तर के गोदामों की जरूरत भी बढ़ी है। मास्टर प्लान-2047 में इस बदलती जरूरत को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक क्षेत्रों में छोटे गोदाम और वितरण केंद्र विकसित करने की अनुमति देने की दिशा में योजना बनाई गई है।

इसका उद्देश्य माल को एक ही बड़े केंद्र में जमा करने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में वितरित करना है, ताकि अंतिम चरण की डिलीवरी आसान हो और शहर के मुख्य हिस्सों में भारी मालवाहक वाहनों का दबाव कम किया जा सके।

21 जून 2018 से पहले बने गोदाम समूहों के लिए नियमितीकरण का रास्ता

मास्टर प्लान में 21 जून 2018 से पहले बने गैर-निर्धारित गोदाम समूहों को कुछ शर्तों के साथ नियमित करने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए कई महत्वपूर्ण मानदंड तय किए गए हैं।

ऐसे गोदाम समूह का क्षेत्रफल कम से कम दो हेक्टेयर होना चाहिए। साथ ही समूह के 55 प्रतिशत से अधिक भूखंडों पर गोदाम संबंधी गतिविधियां होनी जरूरी हैं। इसके अलावा उस क्षेत्र की सीधी पहुंच कम से कम 30 मीटर चौड़ी सड़क से होनी चाहिए।

इसका मतलब यह है कि हर अनधिकृत या अनियोजित गोदाम को नियमित नहीं किया जाएगा। केवल निर्धारित मानकों और शर्तों को पूरा करने वाले गोदाम समूहों को ही नियमितीकरण का लाभ मिलने की संभावना होगी।

शहर की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को व्यवस्थित करने पर जोर

मास्टर प्लान-2047 का व्यापक उद्देश्य दिल्ली में माल भंडारण और परिवहन को रिहायशी एवं घनी आबादी वाले इलाकों से अलग कर एक व्यवस्थित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार करना है। इससे एक तरफ शहर में ट्रैफिक और पार्किंग का दबाव कम करने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए माल भंडारण और वितरण की बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।

कुल मिलाकर, मास्टर प्लान-2047 के प्रस्ताव लागू होने पर दिल्ली के रिहायशी इलाकों, गांवों और पुराने बाजारों में मौजूद गोदाम गतिविधियों का स्वरूप बदल सकता है। नियमों के अनुरूप गोदामों को नियमित करने और बाकी गतिविधियों को निर्धारित माल ढुलाई केंद्रों, थोक बाजारों तथा औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की योजना दिल्ली की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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