नेताओं की पहली पसंद बनी Gen-Z की भाषा; सीधे जुड़ाव के लिए बदला चुनावी संवाद का खाका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया संदेश कई वजहों से चर्चा में है। इस बार उन्होंने पारंपरिक टीवी संबोधन या प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय इंस्टाग्राम पर एक सेल्फी वीडियो पोस्ट कर सीधे देश की युवा आबादी तक अपनी बात पहुंचाई। संवाद का यही अनोखा अंदाज अब भारतीय राजनीति की एक नई पहचान बनता नजर आ रहा है।
दरअसल, देश में युवाओं के बीच गंभीर मुद्दों पर चर्चा बेहद तेज हुई है। लंबे भाषणों और रैलियों की तुलना में सोशल मीडिया पर 15 से 30 सेकंड के छोटे वीडियो (रील्स) तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। यही वजह है कि नेताओं का ध्यान अब X (ट्विटर), फेसबुक या व्हाट्सएप से हटकर इंस्टाग्राम जैसे विजुअल प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और ‘जेन-अल्फा’ लंबी स्पीच के बजाय त्वरित, सीधा और बिना किसी बनावट का संदेश पसंद करती है। सिर्फ मनोरंजन का माध्यम मानी जाने वाली रील्स अब युवाओं में किसी मुद्दे पर बड़ा जनमत तैयार करने और उनकी राय समझने का सबसे प्रभावशाली जरिया बन चुकी हैं।
बॉलीवुड सितारों की तरह अब नेता भी समझ रहे हैं कि युवाओं से मजबूत रिश्ता बनाने के लिए उनकी डिजिटल भाषा और उनके पसंदीदा मंचों पर सक्रिय रहना अनिवार्य है। आने वाले समय में केवल पीआर टीमों के भरोसे राजनीति नहीं चलेगी; नेताओं को खुद कैमरे के सामने आकर पारदर्शी व सहज संवाद स्थापित करना होगा।








