डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अब आरोपियों को आसानी से नहीं मिलेगी जमानत

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देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में गिरफ्तार आरोपियों को सामान्य परिस्थितियों में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने निचली अदालतों और हाईकोर्ट से कहा है कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही जमानत देने पर विचार किया जाए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इन्हें साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लूट और डकैती जैसे संगठित अपराध की श्रेणी में देखा जाना चाहिए। अदालत ने जांच एजेंसियों को भी निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाए।

कोर्ट ने विशेष रूप से चिंता जताई कि डिजिटल अरेस्ट गिरोह अक्सर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं और उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी ठग लेते हैं। अदालत ने इसे समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए ऐसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

सुनवाई के दौरान एक आरोपी ने दावा किया कि उसने केवल बैंक खाता खुलवाने में मदद की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अपराध को अंजाम देने में किसी भी प्रकार से सहयोग किया है, तो उसे भी मुख्य आरोपियों की तरह जिम्मेदार माना जाएगा।

जांच एजेंसियों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के जरिए देशभर में अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जा चुकी है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इन मामलों की व्यापक जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों को निर्देश दिए थे। अदालत के ताजा रुख को डिजिटल ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

Kinni Times
Author: Kinni Times