उत्तर प्रदेश में इस बार करवाचौथ का पर्व खास होने जा रहा है। अब जेल में बंद महिलाएं भी अपने पति के साथ करवाचौथ का व्रत और पूजा कर सकेंगी। यह पहल राज्य महिला आयोग की ओर से की गई है, जिसने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इस पर्व को मनाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग की अध्यक्ष ने अपने पत्र में कहा है कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग (संशोधन) अधिनियम, 2013 की धारा 9 के तहत लिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिला बंदियों को भी उनके भावनात्मक और पारिवारिक अधिकारों से वंचित न रहना पड़े। आयोग का कहना है कि “करवाचौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, निष्ठा और विश्वास का प्रतीक पर्व है, जो पति-पत्नी के रिश्ते में स्नेह और आत्मीयता को मजबूत बनाता है।”
इस पहल के तहत जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि जिन महिला बंदियों के पति जेल से बाहर हैं, उन्हें वीडियो कॉल या मुलाकात के माध्यम से व्रत खोलने की सुविधा दी जा सके। वहीं, अगर पति भी किसी अन्य जेल में बंद हैं, तो दोनों को एक स्थान पर लाने या वर्चुअल माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
राज्य महिला आयोग का कहना है कि यह प्रयास जेल की दीवारों के भीतर भी इंसानियत और भावनात्मक जुड़ाव की भावना को पुनर्जीवित करेगा। इससे महिला बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक पुनर्वास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, शासन स्तर पर भी एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्य सचिव ने वित्तीय अपराधों और धोखाधड़ी पर नियंत्रण के लिए सभी विभागों और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने और ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए अभियान चलाया जाएगा।
इस तरह, राज्य सरकार एक ओर महिलाओं के भावनात्मक अधिकारों की रक्षा कर रही है, तो दूसरी ओर वित्तीय अपराधों के खिलाफ सख्ती का संदेश भी दे रही है।








