नई दिल्ली: जामा मस्जिद के अंदर और उसके आसपास दुकान लगाने वालों के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त संदेश सामने आया है। अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वे करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने आदेश दिया कि सर्वे के दौरान अवैध निर्माण, अतिक्रमण और बिना अनुमति संचालित दुकानों की पहचान की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाने की कार्रवाई भी की जाए। कोर्ट ने MCD को यह सर्वे दो महीने के भीतर पूरा करने को कहा है।
यह जनहित याचिका पुरानी दिल्ली के कुछ स्थानीय निवासियों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जामा मस्जिद के आसपास सार्वजनिक भूमि पर अवैध पार्किंग, दुकानों, अस्पतालों और फेरीवालों के जरिए अतिक्रमण किया गया है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि मस्जिद के आसपास खुली जमीन पर निजी निर्माण किए गए हैं।
याचिका में शाही इमाम और उनके रिश्तेदारों पर भी मस्जिद के आसपास अतिक्रमण करने के आरोप लगाए गए थे। साथ ही, मस्जिद की मीनारों और छत पर दुकानें, कैफे और पेड टॉयलेट चलाने की बात भी कही गई थी।
हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत तस्वीरों की सच्चाई सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही तय की जाएगी। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि जामा मस्जिद राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है और इसके आसपास किसी भी तरह का अवैध निर्माण गंभीर मामला है।
इन निर्देशों के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है। अब सभी की नजरें MCD की सर्वे रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।








