जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन 18वें दिन भी जारी, सेहत बिगड़ी तो तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर

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17 दिनों में कम हुआ 8.5 किलो वजन, जान को खतरे की आशंका

नीट (NEET) पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे प्रख्यात शिक्षा और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। 18वें दिन भी उनका अनशन जारी है, लेकिन उनकी तेजी से गिरती सेहत ने सबकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीच अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर गुहार लगाई गई है कि सोनम वांगचुक की जान को गंभीर खतरा है, इसलिए सरकार को उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने और जरूरत पड़ने पर जबरन खाना खिलाने (Force-feeding) के निर्देश दिए जाएं।

खड़े होने पर आ रहे चक्कर, डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही है निगरानी

याचिका और प्रदर्शन स्थल से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 17 दिनों के कड़े अनशन के कारण सोनम वांगचुक का शारीरिक स्वास्थ्य काफी नाजुक हो गया है:

  • वजन में भारी गिरावट: भूख हड़ताल के दौरान उनका करीब साढ़े आठ (8.5) किलो वजन कम हो चुका है।

  • क्रिटिकल पैरामीटर्स: उनका ब्लड प्रेशर (BP) और ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया है।

  • शारीरिक कमजोरी: आंदोलन से जुड़े सहयोगियों के अनुसार, वांगचुक को बैठने या खड़े होने की कोशिश करने पर भी तेज चक्कर आ रहे हैं, यहाँ तक कि उन्हें वॉशरूम जाने में भी अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौके पर मौजूद डॉक्टरों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे उनकी मेडिकल निगरानी कर रही है।

20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ का ऐलान:

इतनी गंभीर शारीरिक स्थिति के बावजूद सोनम वांगचुक अपने संकल्प पर अडिग हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं लेती, उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। वहीं, इस आंदोलन को और धार देने के लिए प्रदर्शनकारियों ने आगामी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक बड़ी पदयात्रा (संसद मार्च) निकालने का भी ऐलान कर दिया है।

Kinni Times
Author: Kinni Times