गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से शुरू, जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

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15 जुलाई से आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र शुरू हो रहे हैं, जो 23 जुलाई तक चलेंगे। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना, जप, तप और साधना की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तंत्र साधना, आध्यात्मिक साधना और आत्मबल बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष गुप्त नवरात्र का शुभारंभ पुष्य नक्षत्र में हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। पहले दिन यानी 15 जुलाई को घट स्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त सुबह 7:43 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा। इस दौरान सिंह और कन्या लग्न दोनों ही कलश स्थापना के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं।

धार्मिक मान्यता है कि इस बार मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आगमन करेंगी और गज (हाथी) पर प्रस्थान करेंगी, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। गुप्त नवरात्र में साधक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा कवच, शतनाम पाठ तथा विशेष मंत्रों का जाप करते हैं।

विद्वानों का कहना है कि वर्ष में चार नवरात्र आते हैं—चैत्र, आषाढ़, आश्विन और पौष। इनमें आषाढ़ और पौष के नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है, जिनका विशेष महत्व तंत्र और गूढ़ साधना के लिए माना जाता है। इस दौरान संयम, मौन, ब्रह्मचर्य और सात्विक जीवनशैली का पालन करने की सलाह दी जाती है।

श्रद्धालुओं को कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा को लाल चुनरी, सिंदूर, नारियल, फल, बताशे, तिल के लड्डू और लाल गुलाब अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। साथ ही निंदा, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर साधना करने से आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।

गुप्त नवरात्र के पहले दिन कई प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों में मां शैलपुत्री का विशेष श्रृंगार, दुर्गा सप्तशती का पाठ और शतचंडी यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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Author: Kinni Times