सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काटता है और वह जख्मी होता है या उसकी मौत हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी और पीड़ित या उसके परिजनों को मुआवजा देना अनिवार्य होगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं।
मामले पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर लोग कुत्तों की इतनी चिंता करते हैं तो उन्हें सड़कों पर छोड़ने के बजाय अपने घर में रखें। सड़क पर घूमते कुत्ते आम लोगों के लिए डर और खतरे का कारण बन रहे हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि भावनात्मक तर्क केवल जानवरों के लिए नहीं, बल्कि इंसानों की सुरक्षा के लिए भी होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने साफ किया था कि सार्वजनिक और सरकारी परिसरों में कुत्तों की मौजूदगी को रोका जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आम लोगों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और सख्त कदम माना जा रहा है।








