दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों की खुलेआम अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज रोड स्थित सिद्धार्थ आश्रम, राम मंदिर रोड के पास फार्म नंबर CN-1157, कोको फार्म और जयपुरिया फार्म के बीच रात के समय अवैध ट्यूबवेल बोरिंग किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार, फर्जी परमिशन के आधार पर GRAP-3 के तहत डीजल मशीनों पर लगी रोक के बावजूद रात में बोरिंग कराई जा रही है, जिससे प्रदूषण फैल रहा है। इस मामले को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर कॉल भी की गई, लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने कथित तौर पर यह कहकर कार्रवाई से इनकार कर दिया कि बोरिंग के लिए परमिशन मौजूद है, जबकि NGT द्वारा दिल्ली में ट्यूबवेल बोरिंग पर रोक लगी हुई है।
शिकायत में OA नंबर 33/2022 (प्रीति पाल शर्मा बनाम सरकार एनसीटी दिल्ली) के आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इसके बावजूद अवैध रूप से बोरिंग की अनुमति दी जा रही है। आरोप है कि साकेत तहसील के एक अधिकारी, साउथ ज़ोन के एक BDO और एक विधायक ने कथित तौर पर 25 लाख रुपये की रिश्वत लेकर करीब 15 बोरिंग की परमिशन दी है। इन परमिशनों का इस्तेमाल कथित रूप से फार्महाउस मालिकों द्वारा कमर्शियल कोठी-बंगले और स्विमिंग पूल के लिए किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, इसी सप्ताह करीब 15 और फार्महाउसों में भी फर्जी और गैरकानूनी परमिशन के आधार पर रात के समय GRAP-3 नियमों का उल्लंघन करते हुए डीजल मशीनों से बोरिंग कराए जाने का आरोप लगाया गया है।
मामले में मांग की गई है कि दी गई करीब 30 कथित फर्जी परमिशनों की जांच CBI से कराई जाए, यह पता लगाया जाए कि चुनिंदा फार्महाउस मालिकों को ही बोरिंग की अनुमति क्यों दी जा रही है और GRAP-3 के उल्लंघन में इस्तेमाल हो रही डीजल मशीनों को तत्काल सील किया जाए। साथ ही, अवैध ट्यूबवेल बोरिंग को ध्वस्त करने की भी मांग की गई है।
यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पर्यावरणीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि NGT और संबंधित विभाग इस गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं।








