केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की सियासत में घमासान और तेज़ हो गया है। विपक्षी दल इस इस्तीफे को महज एक प्रशासनिक कदम मानने के बजाय पूरी शिक्षा प्रणाली की विफलता के रूप में रेखांकित कर रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने तीखा हमला बोलते हुए सरकार के इस कदम को सिर्फ चेहरा बदलने की कसरत करार दिया है।
“चेहरा बदलने से नहीं सुधरेंगे हालात”
पत्रकारों से बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने स्पष्ट किया कि केवल किसी मंत्री के पद छोड़ देने से देश के करोड़ों छात्रों की समस्याएं हल नहीं होंगी। उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कोई फर्क नहीं पड़ा है। एक धर्मेंद्र प्रधान गया तो दूसरा धर्मेंद्र प्रधान आ जाएगा। सवाल यह नहीं है कि कुर्सी पर कौन बैठता है, बल्कि सवाल उस सोच का है जिसके तहत देश की शिक्षा व्यवस्था चलाई जा रही है।”
RSS के हस्तक्षेप पर कड़ा ऐतराज
कांग्रेस सांसद ने सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा क्षेत्र में संघ का बढ़ता वैचारिक दखल ही असली समस्या है। उन्होंने कहा, “हम तो आरएसएस की संलिप्तता के खिलाफ हैं कि आरएसएस ने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को तबाह कर दिया है।” मसूद के मुताबिक, संस्थागत निष्पक्षता खत्म होने और वैचारिक एजेंडा थोपे जाने के कारण ही आज देश की परीक्षाएं और शैक्षणिक संस्थान विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहे हैं।








