स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ‘शंकराचार्य’ लिखे जाने पर जताया कड़ा एतराज
अयोध्या में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद की मान्यता और उपाधि को लेकर वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। विवाद की ताजा वजह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस नोट बना है, जिसमें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग किया गया था। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ट्रस्ट को एक औपचारिक कानूनी नोटिस जारी किया है।
कानूनी नोटिस में क्या पूछे गए सवाल?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से सीधा जवाब मांगा गया है:
मान्यता का आधार: ट्रस्ट से पूछा गया है कि किस प्राधिकार, दस्तावेज या अदालती आदेश के आधार पर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य संबोधित किया गया है?
उपाधि पर सवाल: नोटिस में इस बात पर जोर दिया गया है कि बिना किसी आधिकारिक या शास्त्रीय मान्यता के किसी व्यक्ति को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में दर्शाना भ्रामक है।
संत डॉ. रामानंद दास ने स्वामी वासुदेवानंद का किया समर्थन
दूसरी ओर, इस विवाद के तूल पकड़ते ही संत समाज की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
वास्तविक शंकराचार्य का दावा: संत डॉ. रामानंद दास ने मीडिया के सामने प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का खुलकर पक्ष लिया। उन्होंने दावा किया कि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ही ज्योतिष पीठ के वास्तविक और वैध शंकराचार्य हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद के दावों पर सवाल: डॉ. रामानंद दास ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के दावों और उनके द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ट्रस्ट के जवाब पर टिकीं सभी की निगाहें: अयोध्या और पूरे देश के धार्मिक व सामाजिक हलकों में इस घटनाक्रम के बाद बहस काफी तेज हो गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस कानूनी नोटिस का क्या लिखित या आधिकारिक जवाब देता है।








