अमेरिका ने तीसरी रात भी ईरान के सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य गतिरोध अब एक बेहद खतरनाक और बेकाबू मोड़ पर पहुंच चुका है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, अमेरिकी वायुसेना ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई रणनीतिक और संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर सिलसिलेवार हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा गया है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए की गई है।

क्यों किए जा रहे हैं ये हवाई हमले?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, लगातार तीन रातों से किए जा रहे इन हवाई हमलों का सीधा मकसद ईरान की लड़ाकू क्षमताओं को पंगु बनाना है। अमेरिकी सेना ने विशेष रूप से ईरान के उन्नत ड्रोन (UAVs) अड्डों, मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स, हथियार डिपो और तटीय निगरानी (Coastal Surveillance) चौकियों को निशाना बनाया है।

अमेरिका का दावा है कि ईरान इन ठिकानों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में अपनी सैन्य आक्रामकता बढ़ाने के लिए कर रहा था। इन क्षमताओं को कमजोर करके, अमेरिका स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले वैश्विक कारोबारी जहाजों (Commercial Cargo Ships) और आम नागरिकों की सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करना चाहता है।

रणनीतिक रूप से क्यों अहम है ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’?
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री तेल मार्ग माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा इसी तंग रास्ते से होकर गुजरता है। पिछले कुछ दिनों से इस रूट पर बढ़ते सैन्य टकराव और व्यापारिक जहाजों पर मंडराते खतरों के बाद वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में भी हड़कंप मचा हुआ है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस रूट को ब्लॉक करने या यहाँ से गुजरने वाले कार्गो शिप्स को बंधक बनाने की फिराक में था, जिसके जवाब में अमेरिका को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

Kinni Times
Author: Kinni Times