अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग तेज, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

SHARE:

:उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने पर केंद्र की मोदी सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। इस मामले ने एक बार फिर अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने और मामले में कथित वीआईपी एंगल की जांच को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

 

इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए अंकिता के माता-पिता

 

अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे थे। परिवार की प्रमुख मांग है कि भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी एंगल की जांच पूरी नहीं कर लेती।

 

14 अक्टूबर को राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी अंकिता के माता-पिता से मिलने इंडिया गेट पहुंचे थे। कांग्रेस नेताओं ने परिवार के प्रति समर्थन जताते हुए उनकी मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की। हालांकि, देर रात तक चले प्रदर्शन के बाद 15 अक्टूबर की तड़के दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने पुलिस और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।

 

राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 

राहुल गांधी ने अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि न्याय की मांग कर रहे परिवार के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि पीड़ित परिवार की आवाज सुनने और उनकी मांगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है।

 

राहुल गांधी ने परिवार की मांग का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाने पर विचार किया जाए। कांग्रेस का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने और परिवार की आशंकाओं का समाधान होने तक इस नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष इस मुद्दे को महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और पीड़ित परिवारों के अधिकारों से जोड़कर उठा रहा है।

 

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?

 

अंकिता भंडारी उत्तराखंड की रहने वाली 19 वर्षीय युवती थीं, जो ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

 

हालांकि, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अंकिता के परिवार का आरोप है कि इस पहलू की भी पूरी जांच होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर परिवार लगातार आवाज उठा रहा है। जनवरी 2026 में कथित वीआईपी एंगल से जुड़ी जांच को लेकर मामला फिर चर्चा में आया और अब दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद विवाद ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।

 

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रोकने की मांग पर अड़ा परिवार

 

अंकिता के माता-पिता का कहना है कि जब तक सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए। परिवार चाहता है कि जांच में कथित वीआईपी एंगल से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिले और मामले में यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।

 

इस पूरे मामले में दुष्यंत कुमार गौतम को लेकर परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

 

फिलहाल, अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने पीड़ित परिवार की मांगों का समर्थन किया है, जबकि परिवार सीबीआई जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। अब इस मामले में जांच की प्रगति और परिवार की मांगों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Kinni Times
Author: Kinni Times